(1) तेरे अहसास की खुशबू रग रग में समाई है,
अब तू ही बता क्या इसकी भी कोई दवाई है।
(2) चाहत बन गए हो तुम,
कि आदत बन गए हो तुम,
हर सांस में यूं आते read more >>
प्रेम की स्वप्निल डगर पर
दो तरफ हम एक पथ पर
पुलक चलते, समानांतर
पर कभी जुड़ने की कोई आस न हो
प्रेम हो, पर मिलन की कोई प्यास न हो!
एक सखी � read more >>
कविता . -हंसी खो गई है।
रचना -जितेन्द्र शर्मा।
तिथी -14/01/2023
सब कुछ तो है, बस हंसी खो गई है।
पेड़ से उतर हमने अट्टालिका भवन बनाये हैं।
सोन read more >>