आज की युवा पीढ़ी होने के नाते मैं कुछ खुद के अपने विचार लिख रही हु जैसा की सब को पता है आज आधुनिकता इतनी के जाता बड़ गई है की हमे हमारी जि� read more >>
ऐ- चांद तू सोच कितना खुशनशीब है,
आसमां में रहकर भी धरा के करीब है,
मैं लिख रहा हूँ मेरे कल्पित विचार मेरी लेखनी से,
तुझ से ही करवाचौथ, तुझ read more >>
स्वरचित रचना--- प्यार किया है तो..!
संदर्भ--- प्रेम ही ईश्वर है!
प्यार किया है तो ,
क्यों रिस्क से डरें।
मरना तो एक दिन है ही,
तो क्यों न इश्� read more >>
स्वरचित रचना--- क्यूं जले पर छिड़कते...!
संदर्भ- प्यार-मनुहार
क्यूं जले पर छिड़कते नमक हो प्रिये।
एक तो मारा हूं वैसे ही प्यार का,
दूजा त� read more >>
भगवान भोलेनाथ के श्रीचरणों में, सादर साष्टांग निवेदित, स्वरचित लोकभाषायी अवधी रचना।
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हथवा त्रिशूल,डमरू,नन्दी पे read more >>