कहानी- "अनोखा बैर"
लेखक- जितेन्द्र शर्मा
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गोवर्धन चौधरी और बालकिशन मिश्र एक दूसरे के जन्मजात पड़ोसी थे। एक दूसरे के सुख-दुख में read more >>
तर्ज=>
शीशे का था दिल मेरा हाय,पत्थर का जमाना था दिल टूट गया
जिनका हाथ में हाथ था हाय,मुझे कुछ सिखाना था साथ टूट गया!
(नाम) तुमने भला ह� read more >>
तर्ज़=>सरकी सर जो धीरे धीरे,मे पागल हुआ रे में धीरे धीरे
टेक=>ला ला ला ला
निकली जो घर से धीरे धीरे,छुप गया रे वो तो धीरे धीरे
ये गुजरिआ... � read more >>