उड़ने दो उन्हें खुले आसमान में फिर लौट कर वे ज़माने नहीं आते |जब माँ की ऊँगली पकड़ कर चलते होवे बहाने जीवन में फिर कभी नहीं आते |जब पापा के � read more >>
दिनाका - (05)/12/2022)
(गटबन्धन)
शाईरी सोमवार
| शायार-लेख, मोहम्मद फैजान सिद्धिकी:
पिता रईस अहमद सिद्धिकी.
जब दो दिल- आपास में। मिलते हैं।
तो � read more >>
वो भूखा था वो प्यासा था
वो घर से दूर ज़रा सा था
जो मारा गया कल दंगें में
हिन्दू था या मुसलमान वो
इतना सच है इन्सान था वो
जो मारा गया कल द� read more >>