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मेरी मां की निगाहें

MUKESH KUMAR DHODHAWAT 05 Aug 2025 शायरी अन्य मेरी निगाहें मेरा कर्म देखती हैं 18174 0 Hindi :: हिंदी

मेरी निगाहें मेरा कर्म देखती हैं 
है मेरा सफर अजीब मेरी मां देखती हैं 
हर ढलती शाम को किया किनारा 
मेरी निगाहें हर गिलास में जाम देखती है 
आखिरी सहारा समझ कर इसको लगाया गले
 ये करतब दुनिया देखती हैं
निकल गए थे जो डूबे थे किसी दिन शराब में 
निकल नहीं पाए वो सितमगर जो गए थे बाजार में 
सारा जहां को अच्छा बताया 
खुद को गलत बता कर 
क्योंकि ये अच्छाई मेरी मां देखती हैं

मुकेश कुमार धोधावत 
7726075950

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