संदीप कुमार सिंह 20 Sep 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 30868 0 Hindi :: हिंदी
(कुंडलिया छंद) धीरज जिनके पास हो,लिखे वही इतिहास। एक भरोसा राम का,पूर्ण करे सब आस।। पूर्ण करे सब आस,सबल वो हमको रखते। खिलते सुरभित फूल,इतिहास नव हम लिखते।। कहते कवि संदीप,बने हम सब अरु नीरज। यदा करे संसार,उसे रखते जो धीरज।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....