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कान्हा छोड़ गयो देश रे -उनका आया नहीं संदेश रे

Samar Singh 17 Sep 2023 गीत दुःखद श्री कृष्ण जी ब्रज छोड़ के चले गए है, हर तरफ उदासी फैल गयी है l 37414 0 Hindi :: हिंदी

कान्हा छोड़ गयो देश रे, 
उनका आया नहीं संदेश रे l

मधुवन के पंछी रोवे, 
रोती है जमुना की मछली l
गायें आँखों से मोती बरसाती है, 
गोपियाँ बन गयी है पगली l
आजा लेके अपना वहीं भेष रे, 
कान्हा छोड़ गयो देश रे, 
उनका आया नहीं संदेश रे l

पनघट की पनहारन, 
लेके खड़ी है गागर l
रास्ता तेरा देखे मोहन, 
आँखें बन गयी है सागर l
मुरली वाले काहे गयो परदेश रे, 
कान्हा छोड़ गयो देश रे, 
उनका आया नहीं संदेश रे l
 
राहों में चुपचाप राधा खड़ी है, 
ये कैसी दुःख की घड़ी है l
राधा बन गयी तेरी जोगन, 
ब्रज का हाल बुरा है मोहन l
एक बार वंशी बजा, कुछ ना कहूँ शेष रे, 
कान्हा छोड़ गयो देश रे, 
उनका आया नहीं संदेश रे ll

रचनाकार - समर सिंह " समीर G "

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