कविता ( गिला )
रब से न कोई गिला !
जो मिला सही मिला !!
फ़क़ीरी में, मैं हूँ पला !
फ़क़ीरी का भी हो भला !!
फ़क़ीरी से ही सीखा हूँ !
जीने की हर कला read more >>
तू इधर इधर के बात न कर
ये बता तेरा इरादा क्या हैं !
तू हर बार दोसी बताता हैं मुझे
लेकिन ये तो बता तेरा सच क्या हैं !!
शहर के शहर हैं जल रह� read more >>
बारिश का मोसम था हर तरफ पाणी बिखरा हुआ था हम बच्चे कंपनी पाणी में खेल रहे थें हमारे घर के पिछे बड़ा सा निम, पिपल के बडे़ से पेड थे हम पाणी � read more >>