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छोटे-छोटे कदमों से हम चले जाएंगे, मंजिल दूर हो चाहे कितनी भी हम पहुंच जाएंगे छोटे-छोटे कदमों से हम चले जाएंगे आएंगी बड़े मुश्किल हाल� read more >>
चुपचाप बैठ मैं देखता रहा, कभी पेड़ों की हिलती हुई पत्तियों को तो कभी उमड़ते हुए बादलों को न जाने कब यह बारिश कराएगी या यूं ही मेरे सामन� read more >>
जिंदगी इंसान के जीवन में उससे कई बार परीक्षा लेती है ( सीख ) __ बस इंसान को उस परीक्षा में पास होने के लिए संयमी बनना पड़ेगा � read more >>
सत्य चमकता है सितारों में कहीं उसकी रोशनी बयां करती है ,है वजूद उसका आसमां में कही। ********सत्य चमकता है सितारों में कहीं दूर होते हैं सित� read more >>
खुद ,से नजर झुका के आईन से मत ,पुछ - के खूबसूरत है ! क्या तू ..... कह ,दे 'अपने दिल से अपने' , के 'कोई तू भी,' अपना मुकाम बना ले । फिर खुद जमाना कहे � read more >>
"पसन्द किया उसने मुझे" कोशिश भी कि, मुझे कोई पहचान मिले लेकिन ,"वो हार गई " क्योकि ,उसकी ऊमीद से मेरी मेहनत कम थी ! read more >>
जो आया है उसे जाना है, ये सदियों से रीत चली आई है। आने की ख़ुशी और जाने का गम , लोगों के मन में निशान छोड़ जाता है । कुछ समय के लिए वो ह� read more >>
जिंदगी से तू ना भाग जिंदगी तुझे बुलाती है परिस्थितियों मे तू उलझा क्यों परिस्थितियों से भागता है क्यों उठ जाग परिस्थितियों का तू साम� read more >>
हुई बहस एक दिन फूल और काँटों में फूल ने कहा काँटों से मुझे देखकर लोग मुझे अपने हृदय से लगाते हैं तुझे देखकर लोग तुझे तोड़ दूर फेककर आ� read more >>
रो रो के जिये हैं आज तलक और कितना रोना बाक़ी है अच्छे के लिए होता है सब फिर कितना होना बाक़ी है। इस दुनिया में वो नीर कहाँ जो मन की प्यास read more >>
बोलक्कड इंसान 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐###################### दुनिया बड़ा वेदर्दी है, करती बहुत मनमर्जी है। बात भले वो खुद कहे, बाद में बनते अलगर् read more >>
म्हारी प्यारी खेजङी, ऊनाळै सियाळै तुं रेवै हरी-भरी, काळा हिरण थारै छिंया मे कुचाळा मारै, जद ऊनाळै मे सगळा वृक्ष सूख जावै। पण तुं किंया हरी-भरी रेवै, जेठ री लू मे तुं एकली खङी मुस्करावै, जीव थारी छींया मे बैठ अर जान बचावै ऊनाळै मे पाणी घणी घणी कोसा तांई नी मिळै, पण तुं खेजङी हरी-भरी रेवै। जेठ रै तीखै तावङीयै मे जींवा रै होठां माथै, फेफ्फियाँ आ जावै पण तुं युं खङी मुस्करावै, मारवाङ रा किसान थारी साँगरी ने गणै चावै सुं खावै, थारै लूंख ने खा'र अणूता ऊँठ अरङावै। धन्य धन्य थारी छाँव खेजङी, म्हारी रुपाळी प्यारी खेजङी। मिंमझर, साँगरी और खोखा देवै, थारो हाथ कदी न खाली रेवै। चिङी कमेङी री आश्चर्य दाता है तुं, केर,बोरङी अर किकर री साथी तुं। मारवाङ री शान खेजङी, म्हारी प्यारी रुपाळी खेजङी। - कवि सुनील कुमार नायक
म्हारी प्यारी खेजङी, ऊनाळै सियाळै तुं रेवै हरी-भरी, काळा हिरण थारै छिंया मे कुचाळा मारै, जद ऊनाळै मे सगळा वृक्ष सूख जावै। पण तुं किंया read more >>
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