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हैं मानव तुम शहर जाकर गांव को कैसे भुल गए तुम भुल गए वो वन और जंगल जहां पर तुम खेलते थे है मानव तुम भुल गए गांव की प्यारी मिट्टी को हैं � read more >>
हैं मानव तुम शहर जाकर गांव को कैसे भुल गए तुम भुल गए वो वन और जंगल जहां पर तुम खेलते थे है मानव तुम भुल गए गांव की प्यारी मिट्टी को हैं � read more >>
धूप और छांव जिंदगी के दो पहलू के रंग मां और बाप जिंदगी के हर कर्म के संग। धन्यवाद read more >>
जो खुदा के बंदे होते हैं ओ हर मुसीबत से दूर होते हैं। धन्यवाद read more >>
है मानव तुम बने ईर्ष्यालु तो जग का कैसे होगा कल्याण । पर कुछ होते है मानव जो ईर्ष्या भाव भी रखते है। जो दूसरे read more >>
वो जो भटक रहा है इंसान कुछ ना करता काम जग मैं कहता है में हु मेहनती सिर्फ आलस का मारा है ईश्वर ने दिया शरीर है read more >>
अभिमान न कर, मत उलट-पुलट संसार अरे विध्वंस अरे मच जाएगा। आंखों में दीप जला दुर्दिन में काम आएगा है आज दंभ का पुतला रचना का मूल्य न समझ� read more >>
कितना प्यारा था बचपन मेरा वो मिट्टी के प्यारे खिलौने जो हम रो कर ले आते थे वह गांव की प्यारी तलैया जिसमे read more >>
मैं अक्सर नहीं समझती क्या कहती हूं? मैं सीमित हूं इसमें व्याकुलता है क्यों विस्तृत नहीं हूं? फैल जाना है जग का नियम सिकुड़ कर आधारही� read more >>
जिंदगी पास बुलाती है हमें कुछ सिखाने के लिए जिंदगी हमें रूलाती है हमें कुछ सिखाने के लिए जिंदगी हमें हंसाती है हमें कुछ सिखाने के लिए read more >>
मित्रता मित्र रिश्ता भाई जैसा, रामलाल मित्र है कैसा। छठवीं कक्षा में हुई पढ़ाई, मुझसे आगे मित्र है भाई। देखन में वो छोटा लागे, उ� read more >>
अकेलेपन ने मुझे रुलाया है। पर रुलाते रुलाते बहुत कुछ सिखाया है। अकेलेपन ने मुझे रास्ते में भटकाया है, लेकिन राहगिरो को पहचानना भी � read more >>
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