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बक्त हैं की रुकता हैं दुःख हैं की टलता नहीं जख्म अभी तजा हैं एक समय है की बदलता नहीं सदियां गुजर गई कितनी घड़ियाँ गुजर गई न ये बदला म� read more >>
ये ऋ सुन तो दिल में कुछ तो होता हैं तुझे न देखु तो नैना बिचलित होता हैं ये ऋ सुन तो मुझ मे तू ही रहती हैं नहीं तो क्यों होता बेचैन मैं read more >>
पिअबा हमर रंगरेज पियेला बीड़ी ताड़ी जब अबेला घरबा करेला मन मानी रात भर सताबेला मांगेला बार बार पानी पिअबा हमर रंगरेज पियेला बीड़ी त� read more >>
देख के तुझे कितना सुकून मुझे मिलता है ये सिर्फ मैं जानता हूँ। हे तु क्या चीज,ये सिर्फ मैं जानता हूँ। हे तेरा क्या वजूद इस जहा मे ये सिर� read more >>
शीर्षक (वो बीते हुवे दिन) मेरे अल्फ़ाज़ सचिन कुमार सोनकर वो दिन बहोत याद आते हैं। जब माँ के गोद मे बैठ के खाना खाते थे । पिता के कंधे पर स्� read more >>
अजब दस्तूर हैं तेरा मेरे हुनर के मोल भी सूरत से लगाते हो मैंने खुद को गला दिया समय को पिघला दिया तब जा के मिला हैं मंजिल और एक तुम हो read more >>
तेरे आँगन का गुलमोहर कितना अच्छा लगता हे/ कहाँ से लिया तुमने इसको इसकी छाया को तो देखो मानो धरा में बदली का सूरज को ढकना सा इसके पत् read more >>
काले मेघा पानी बरसाये गरजते गरजते काले बादल आये/ छम - छम बारिश की बूंदों को बरसाये धम - धम ओलों को बरसाये, काले मेघा पानी बरसाये/ गाँव � read more >>
क्या लिखू मैं? हा मेरा पहला सवाल सब का दबाव मुझ पे उठाओ कलम लिखो क्या लिखू मैं? आज सोचा चलो उठा लो कलम फिर सोचा क्या लिखू मैं हर बार यह read more >>
मैं खुद से दूर हो गया हूं, कहा हु में लोगो से ये पूछने को मजबूर हो गया हूं। हंसती खेलती जिंदगानी में पता नहीं कब जिम्मेदारी का बोझ आ गया� read more >>
शीर्षक (बारिश का मौसम) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) चेहरे पर खुशियाँ आती है काली घटा जब बदल पर छाती है। झूम के पवन फिर गाती है , पेड़ो प� read more >>
गर्मियों के मोसम को में सहता गया पसीना शरीर से मेरे निकलता गया / कभी छांव की तलाश तो कभी पलास की तलाश में में इधर उधर भटकता गया कभी प read more >>
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