दो पल की जिंदगी हैं,
आज बचपन ,कल जवानी,
परसों बुढ़ापा, फिर खत्म कहानी है।
चलो हंस कर जिए , चलो खुलकर जिए ,
फिर ना आने वाली यह रात सुहानी,
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दोहा छंद "सद्गुण"
सद्गुण सरस सुगन्ध से, महकायें जग आप।
जो आयें संपर्क में, उनके हर लें ताप।।
अंकुश रहे विवेक का, यह सद्गुण सिरमौर।
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शीर्षक (मेघराज)
मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर)
हे मेघराज कब तक आओ गे ,
कब हम पर अपनी कृपा बरसाओ गे।
ऊपर से बरस रही है आग नीचे से धरती उगल र� read more >>
वेज पुलाव बनाने के लिए हमे चाहिए पुलाव चावल 500 ग्राम, हर मटर 250 ग्राम, गाजर 2 से 3 ,
अदरक पेस्ट 2 चम्मच लहसुन का पेस्ट 2 चम्मच, तेल 6 बड़ी चम्मच, � read more >>