गहरी अंधेरी रात के बाद, सुहानी भोर आती है
जेष्ठ की तपिश के बाद, घटाएं घनघोर छाती हैं
'यह भी नहीं रहेगा' का भाव, दुःख का दुःख भुलाता है
तू� read more >>
ये बेटियां,
घर की महकती कलियां,
ये ही तो हैं जो खुशी में भी रुला जाती हैं
ये ही तो हैं जो हर गम को भुला जाती हैं
खुद के सपने भी पिता की औ� read more >>