"ये तन को कभी-
दिल-ए-नज़र देखा ना था"
"मैं ज़िद पर-
अड़ा था अभिमान में पड़ा था"..!!
"बैठ पल भर-
गुरु वाणी सुनी सत्संग में"
"बसा है श्री-
हरि � read more >>
गुजरे उस शाम की तलाश ना थी
जब सिर पापा की गोद में था
हमे लोगो की उम्मीद की चाह ना थी
जब एक उम्मीद पापा की थी
किसी के रूठने से फर्क ही ना � read more >>