पहले पहल जब हम चले थे ,
तब हम नंगे पांव चले थे,
घुटनों के बल घर -आंगन में ,
ठंडी_ ठंडी छांव चले थे !
जब बड़ा हुआ हारा क़िस्मत से,
तब हम सारे दा read more >>
जो खो गई थी मुझसे वह मेरी किताब थी ,
जो तुम्हें मिली नसीब से वह मेरी किताब थी ,
जो पढ़ न पाई तुमने अधूरी सी रह गई _ वह मेरे जीवन की प्यारी मे read more >>
मैं तो तेरे प्यार में कवि बन गया ,
मैं चांद भी न था रवि बन गया , तेरी याद में देखा जब_ जब आइना हमने ___
मेरा बदल के चेहरा तेरी छवि बन गया । read more >>