हम नमी ( भीगने) से क्या डरने लगे...
बारिश हमे डरा रही थी.......
पर वो शायद भूल गई की बारिशों से
तो अपनी पुरानी यारी थी........
पर जिल्लत तो तब हुई, ज� read more >>
सासो के ..........
किनारे बड़े तन्हा थे.........
तू आके इन्हे छू ले बस
यही तो मेरे अरमा थे।
सारी दुनिया से मुझे क्या लेना.......
बस तुझको ही पहचानु
मु� read more >>
कविता- तुम्हारे लिये।
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी- 21/01/2023
निवेदन- प्रस्तुत पंक्तियां नायक के ह्रदय की पीड़ा है एक कृतघ्न नायिका के लिये। read more >>