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जो लोग मेरे सकल से मुझे जज करते थे।आज देखो बही लोग मेरे मरने के बाद मेरी ही तसबीर को अपने प्रोफाइल फोटों फेसबुक पर अपलोड कर रहे है। सि read more >>
अब किताबो से ज्यादा मोटिवेशनल इंसानों से ही मिल रही है।क्योंकि पहले किताबों में पढ़े थे आज इंसानों में देखाई दे रही है। read more >>
पांच बार आबाज दे कर बुलाई जाती है मगर कोई भी उसके तरफ मोतोबज्जे नही होता है।लेकिन ख्वाहिश रखते है डायरेक्ट जन्नत में जाने की। read more >>
नमाज को भी पैसे के जैसा तरबियत दो शाहब क्योंकि पैसे से सब कुछ मिल जायेगी।लेकिन जन्नत कहां मिलेगी जो बिना पैसे के ही मिलती है। read more >>
कोइ भी इंसान बुरा नही है शाहब बस तुम्हारे जरूरत के हिसाब से अच्छा और बुरा दिखाई दे रही है। read more >>
सब के साथ रहो पर जरूरत पर किसी को काम नही आओ यही सिख लोगों ने दे रखी है। read more >>
मैं वैसा ही हूं यार जैसा तुम सोंच रहे हो क्योंकि ये ज्ञान मुझे तुम लोगों से ही सिख रखा है। read more >>
ज्यादे तो पढ़ा लिखा नही हूं जो ज्ञानी बन जाऊं लेकिन एक बात सच है जो बात किताबों से नही सीखा है वो बात लोगों ने सीखा दी है झूठ बोलना। read more >>
अब लोग सच को ही झूठ समझ रहे है तो सच क्यों बोल रहे हो।क्योंकि सच बोल के तुम इतिहास तो नही बदल सकते लेकिन खुद को जरूर बदल दोगे। read more >>
अब लोग सच को ही झूठ समझ रहे है तो सच क्यों बोल रहे हो।क्योंकि सच बोल के तुम इतिहास तो नही बदल सकते लेकिन खुद को जरूर बदल दोगे। read more >>
जीविका कभी इस धूल , धुएँ से एलर्जी थी मुझको रिज़्क़ की तलाश में सब सर-माथे लगा लिया. (रिज़्क़- जीविका ) read more >>
दो आँसू तेरे दो आंसुओं ने मुझे खरीद लिया मगर में इतना मेहंगा नहीं था read more >>
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