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प्यार-महोब्बत
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प्यार-महोब्बत
Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
झूठ बोलकर दुनियां सवारने बालों मरने के बाद जन्नत हासिल कैसे करोगे,क्योंकि झूठ बोल कर दुनियां सवर सकती है जन्नत नही।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जितना हमदर्दी पैसों से है लोगों को उतना हमदर्दी इंसानों से हो जाती तो खुदा जन्नत के सिवा जहन्नुम न बनाई होती।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
या खुदा तुमने जन्नत किस लिए बनाई है यहां तो जहन्नामी ही भरे हुए है,क्योंकि मोहब्बत देने वाला जो भी मिला वो वफा छीन लेता है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
बहुत शौख चढ़ा हुआ था अपनी मोहब्बत को दुआओं में मांगने का,लेकिन आज उसी मोहब्बत को बद्दुआ देने लगा हूं।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मौत से छुपकर कहाँ तक भागोगे क्योंकि मौत वहां भी आ जायेगी जहां तुम्हारी सोंच नही जा सकती है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
दोस्त रूठ कर जा रहे हो लेकिन मेरी मैयत पर झूठी आँसू बहाने मत आना नही तो लोग मेरी मोहब्बत को ताना मरेंगे झूठी मोहब्बत का।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम ग्रेट हो खुदा मालूम था इंसान सिर्फ नफरत के सिवा मोहब्बत नही दे सकता इसलिए हमने उसके स्वागत के लिए जहन्नुम बनाई।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
आज भी हम अकेले है कल भी अकेले रहेंगे क्या फर्क पड़ता है,क्योंकि लोग सिर्फ बद्दुआओं में याद करते है लेकिन दुआओं में नही।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
बहुत जालिम दुनिया है शाहब क्योंकि यहां लोग गरीबों से ही नफरत करते है,लेकिन तुम आमिर बनो ये कोई नही चाहता है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
आज अपने गमों में हम ही मातम माना रहे है लेकिन कल मेरी ऊंचाई देख कर लोग हैरत से मेरी खुशी की मातम मनाएंगे।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब मोहब्बत सिर्फ मांओं के चरणों तक ही सीमित रह गई है,क्योंकि लोगों को मोहब्बत दे दो तो बेवाकुफ समझने लगते है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
नफरत ठूंस कर जन्नत हासिल करने वाले लोग जहन्नुम का जाम पी रहे है,हलाकि जन्नत बनाने वाले ने बता दिया जन्नत सिर्फ मोहब्बत करने वाले को ह
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