सदृण सा इक रिश्ता अब भी निभा रही हूँ ,मैं,।
इस, रिश्ते ,में, बातों का ,दौर खत्म है,।
फिर, भी ,एहसास, न, टूट जाये,।
उम्मीद का आखरी सफर निभा रही � read more >>
जिस दिन मैं पैदा हुई,
उसी दिन दुनिया शुरू हुई थी!!
घर के आंगन में एक नीम का पेड़ था!
वहीं से मेरे जीवन की शुरुआत हुई थी!!
मां नीम पर डाले झू� read more >>
वो मेरे मायके की याद पुरानी,
मेरी आंखों में लेकर आई पानी!
वो सखियों का जो याराना था,
हर मौसम लगता दिवाना था !
वो चिड़ियों सा चहकना......
और � read more >>
वो मेरे गांव की गलियां......
वो खेतों की कच्ची पगडंडियां!
देखकर मदमस्त नाचते मोर...
थिरक उठती थी पांव की पैजनिया।
वो मस्त हवाओं की बेला सु read more >>