मन का हर कोना पुलकित हो जाता है
जब आँगन में मेघ रिमझिम मल्हार गाता है
यूँ तो इक बरस में बारह महीने होते है
लेकिन 'धरा' को केवल सावन का मह� read more >>
आज भी मेरा सीना भले ,तेरे ,नाम का होगा,।
पर मेरा ,जीना , अपने स्वाभिमान का होगा,।।
बिखरे सीसे की क्या ,?भनक सुनते हो,।
टुकड़ों में देखना ,ज़ read more >>
हंस और हंसिनी दोनों एक- दूसरे से बहुत प्रेम करते थें दोनों साथ में कसमें खाए,वादें किए, पर जब निभाने का वक़्त आया तो निभाया उस हंसिनी ने � read more >>