मुखड़ा- एकही हा बात के भाई बावे हमके खेद जी,
प्यार में काहे लोगवा करेला भेद जी,
केहू चाहे दिल ता केहू चाहे छेद जी,
प्यार में काहे लोगवा कर� read more >>
मोहब्ब निगाहों से पढ़ी जाती है,
जरूरी नही 'जिक्र-ए-अल्फ़ाज' हो.!
हुनर होगी तो ये जान जाओगे,
किस हद तक 'दिल-ए-ख़ास' हो..!!
✒️मनीष सिंह 'क्षत्रिय read more >>
मुखड़ा- कटत नईखे दिन नाही कटा तारे रात हो,
टाफी से कईले रहे प्यार शुरुआत हो,
मगले रही नम्बर नाही पुछले रही जात हो,
टाफी से कईले रहे प्यार � read more >>