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दिल की आवाज-तो यूं सबके पास होते हैं
दिल की आवाज़ तो यूं सबके पास होते हैं परन्तु गौर कोई _कोई ही कर पाते हैं। दिल जो तर्क की क्षेत्र से काफी दूर है सरल और बेबाक आवाज़ देती �
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शिक्षक और शिक्षा-मां इस दुनिया की सबसे अच्छी शिक्षिका
आज का विषय-- शिक्षक और शिक्षा । सर्वप्रथम जब बच्चे विद्यालय जाने के लिए पहली बार तैयार होते हैं तो उन बच्चों के मनोभाव कैसे होते हैं ?
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कर्मों का फल-कर्मों का फल भुगतना पड़ता है
कर्मों का फल भुगतना पड़ता है, खेती करने से अन्न उगता है, जवानी में आराम करने वाला भूखा रहता है, चोर अपमान सहता है, इंसान फिर भी बुरे कर्म �
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मन मौजी है दूर खड़ा है
मन मौजी है दूर खड़ा है, मैं कहाँ हूँ वो कहाँ है, कुछ सोचा था भूल गया है। आज का मौसम कुछ ऐसा है, आज का मौसम मन जैसा है। युवा रचनाकार उज्ज
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कमबख्त फिर से एक और वो आया
शीर्षक :– मैं और वो Word –. Meaning मैं। – एस्पिरेंट या विद्यार्थी वो। –भ्रष्ट विद्यार्थी साहब –आयोग या जो body exams कराती है,या उसमें
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शब्द अर्थ को तौलकर- कहिए अपनी बात
शब्द अर्थ को तौलकर, कहिए अपनी बात। सुरभित हों तब जगत में,सुहावना हो रात।। शब्द अर्थ को तौलकर, कहिए अपनी बात। रहिए हरदम मग्न हों, रहे स्
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मुमकिन है सब कुछ यहां-सिर्फ चाह हो यार
(कुंडलिया छंद) मुमकिन है सब कुछ यहां,सिर्फ चाह हो यार। नेक दुआ लेंगें सदा,देंगें सभी दुलार।। देंगें सभी दुलार,मात दूं सदैव दुश्मन। स�
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खोया खोया चांद था-सुखद मिलन की रात
(कुंडलिया छंद) खोया खोया चांद था, सुखद मिलन की रात। शीतल मधुर बयार थी, रिमझिम सी बरसात।। रिमझिम सी बरसात, प्रेम की अगन लगाये। जोड़ा बैठ�
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साहस ही सामर्थ्य है- साधन बस श्रृंगार
(मुक्तक छंद) साहस ही सामर्थ्य है, साधन बस श्रृंगार। बने विजेता जंग का,दुश्मन को दे हार। दुनिया में तूती बजे, प्रजा करे सब वाह_ मन मिजाज �
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रक्षाबंधन का बसंत-अब न रिस्तों का होगा अंत
रक्षाबंधन का बसंत अब न रिस्तों का होगा अंत रक्षा बंधन का आया है ले लेकर खुशियों का बसंत अब न रिस्तों का होगा अंत। रंग बिरंग�
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शेर-बदनाम हुए गालिब तेरे लिए
बदनाम हुए गालिब तेरे लिए। बे-दाग़ तो सिर्फ तू निकला।। .... ललित
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मेरे ख्यालातों-तूँ मेरे ख्यालातों से मुख़ातिब ना हो
हो सकता है तूँ मेरे ख्यालातों से मुख़ातिब ना हो। पर मुझमे एक बात तो जरूर है। कि मैं रिश्तो का तमाशा करके, सुर्खियाँ नही बटोरता। सचिन क�
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