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स्वाभिमान
हम न किसी से कम। बस, लगाओ दम। हिम्मत की क़ीमत, क़ीमत ज़िद्दी विचार में। अंदर से जगानी पड़ती, नहीं मिलती हाट बाज़ार में। हुकूमत उनकी ही �
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सवाल मर नही जायेगा
मस्जिदों को ढहाने से सवाल नही मर जायेगा मंदिरों को बनाने से सवाल नही मर जायेगा सवाल फिर भी जिंदा रहेगा रहती दुनियाँ तक सवाल,बेरोजगार�
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* कर्म हमें करना होगा *
* कर्म हमें करना होगा * भाग्य हमारे साथ है फिर भी कर्म हमें करना होगा । कामयाब होना है हमको तो मेहनत करना होगा ।। चींटी जैसी मेहनत करक
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सुरमा और काजल
ना लगा एक ऑख में सुरमा, और एक ऑख में काजल तू। गर कसूरवार है दो तो संतोष, तो फिर सजा एक को आखिर क्यों।। क्या बन्द पड़े हैं मुख तुम्हारे ,
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* पक्षी *
* पक्षी * पक्षी तुम कितने अच्छे हो ऊंचाइयों को छू सकते हो। ऊंचाइयों पर उड़कर पक्षी गर्व नहीं तुम करते हो ।। राग द्वेष नहीं मन में तेर�
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मां का पल्लू
पल्लू से मां, पसीने को पोंछती। गर्म भाप पल्लू से, जख़मी अक्षि को सेंकती। मां पल्लू से, मुंह करती साफ़। गीला कर सिर पर रखती, जब बढ़ जाता त
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दीपदान
दिव्य ज्ञान रूपी हो यह प्रकाश, अंधकार मुक्त जग ये सारा हो । हो दीपदान का प्रचलन , जिससे रौशन जहॉ ये सारा हो ।। ना हो ऊँच नीच का भेदभाव, �
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विकल्प
नहीं ज्ञान जिस विषय का, उस संदर्भ में कुछ कहना । विकल्प नहीं कोई, खामोशी से बेहतर है ।। भुलाकर गमो के पल को, सीखो आज में तुम जीना । जिं�
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मेरी नन्ही परी
ओ! मेरी लाड़ली ओ! मेरी नन्ही परी डरी थी मैं जब तु आई थी परी डरे थे तेरे बाबा भी तु जब आई थी परी ज़माने की गंदी निगाहों स
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गुलामी
सच्ची है, नहीं तकिया- कलाम। गुलामी, तुझे सलाम। कोई धर्म का, कोई कर्म का, कोई शर्म का गुलाम है। कोई आदत का, कोई मत का, कोई हरम का गुलाम है। क
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दो बात
जवानी बेदाग़ गुज़र जाए, उसे ही गुज़रना कहते हैं। उम्र के अनुसार सुधर जाए, उसे ही सुधारना कहते हैं। घर पर अपनों के बीच मरे, उसे ही मरना क�
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गर मांगने से
गर माँगने से सबकुछ, मिल जाती हमें खुदा से । तो इस जहां में कर्म की, कोई प्रधानता ही ना होती ।। मशगूल होते हम सब भी, बस दुवा मांगने में ।
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