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देश-प्रेम
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देश-प्रेम
जालिम है तू है हुक्मरान
जालिम है तू ऐ हुक्मरान, ताकत के नशे में तू चूर है। बेशक बेमिसाल है लश्कर तेरा, पर इंकलाब का ये दौर है। लाठियां चलवाई निहत्थों पर तूने,
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जालिम है तू है हुक्मरान
जालिम है तू ऐ हुक्मरान, ताकत के नशे में तू चूर है। बेशक बेमिसाल है लश्कर तेरा, पर इंकलाब का ये दौर है। लाठियां चलवाई निहत्थों पर तूने,
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जालिम है तू है हुक्मरान
जालिम है तू ऐ हुक्मरान, ताकत के नशे में तू चूर है। बेशक बेमिसाल है लश्कर तेरा, पर इंकलाब का ये दौर है। लाठियां चलवाई निहत्थों पर तूने,
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जालिम है तू है हुक्मरान
जालिम है तू ऐ हुक्मरान, ताकत के नशे में तू चूर है। बेशक बेमिसाल है लश्कर तेरा, पर इंकलाब का ये दौर है। लाठियां चलवाई निहत्थों पर तूने,
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लोकतंत्र की रक्षा में प्रतिरोध की भूमिका
लोकतंत्र की रक्षा में प्रतिरोध की भूमिका ✍️ अजय कुमार सूरज की कलम से "मायने यह नहीं रखता कि तुम युद्ध जीते या हारे, मायने यह रखता है क�
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हम पहले इंसान हैं
अपनी डफली छोड़कर, एक स्वर में गाएं हम पहले इंसान हैं, मानवता अपनाएं शरद भूषण मोंगरा
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हमें अभिमान है
हमें अभिमान है अपने वतन पर, हमें अभिमान है अपने वतनप्रस्ति पर। हमें अभिमान है अपने संस्कृति पर, हमें अभिमान है अपने गौरवशाली इतिहास �
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बलिदान वीरों ने दिया
मुखड़ा बलिदान वीरों ने दिया बलिदान वीरों ने दिया ऐसे वीरों को नमन है किया ऐसे वीरों को नमन है किया है किया है किया ऐसे वीरों को नमन
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बिन लड़े बिन मरे हार कैसे मान जाए
बिन लड़े, बिन मरे, हार कैसे मान लोगे? योद्धा हो तुम, वीर हो तुम, पीछे कैसे हट जाओगे? बिन लड़े, बिन मरे, युद्ध से भाग कैसे जाओगे? अभिमन्य�
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देश प्रेम
वतन के लिए मर जाएंगे झुकने न देंगे तिरंगे कि सान चुकाएंगे इस मिट्टी का कर्ज़ चाहे देनी पड़े हमको अपनी जान
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इस मिट्टी का कर्ज़ देश पर
बरसात की हल्की-हल्की फुहारों से भीगी धरती की सौंधी खुशबू जब हवा में घुलती है, तब ऐसा लगता है मानो हमारी मातृभूमि अपने बच्चों को प्यार स�
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भरत तिवारी
भरत तिवारी मरकर भी ज़िन्दा रहेगा भारत का अभिमान रहेगा l आजाद भारत के इस क्रान्तिकारी पर भारतीय को गुमान रहेगा l वो पागल नहीं था �
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