शीर्षक (रोटी)
मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर)
दर दर भटकता इन्सान है रोटी के लिये परेशान है।
कोई घी लगाकर खाता है ,
तो कोई सूखी ही चबाता है� read more >>
शीर्षक (गर्मी का मौसम)
मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर)
उफ़ ये गर्मी हाय ये गर्मी।
उफ़ ये कैसी गर्मी है,
चारों तरफ ही आग है,
ये सब गर्मी का ही read more >>