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SACHIN KUMAR SONKER

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My Articles

मेरी ख़ामोशी को मेरा गुरूर मत समझो, क्योंकि बेवजह आवाज देने की आदत नही है मेरी। ख़ामोश रह कर भी अपनी बात समझाई जा सकती है, बस कोई समझने वा� read more >>
उनकी ख़ामोशी में भी एक शोर था,लब उनके खामोश थे। पर उनकी नज़रों में कुछ और था। कुछ कहना था शायद उनको, दिल यहाँ था पर दिमाग कहीं और था। सचिन read more >>
शीर्षक (माँ दुर्गा) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) तू ही दुर्गा तू ही अम्बे तू ही वैष्णो रानी है। तुझमे ही ये संसार समाया तू ही पर्वत वा� read more >>
शीर्षक (सुबह) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) रात्री कर पहरा खत्म होने को है,एक नई सुबह होने को है। प्रातः काल की बेला है आयी, दृश्य मनोरम read more >>
शीर्षक (गुज़रा ज़माना) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) वो गुज़रा ज़माना बहोत याद आता है। जब माँ के गोद में बैठ के खाना खाते थे, पिता के कंधे प read more >>
शीर्षक (रोटी) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) दर दर भटकता इन्सान है रोटी के लिये परेशान है। कोई घी लगाकर खाता है , तो कोई सूखी ही चबाता है� read more >>
शीर्षक (गर्मी का मौसम) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) उफ़ ये गर्मी हाय ये गर्मी। उफ़ ये कैसी गर्मी है, चारों तरफ ही आग है, ये सब गर्मी का ही read more >>
शीर्षक (भारतीय सेना) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) मिटाने से भी हमारी हस्ती मिटती नहीं, समुंदर में भी हमारी कस्ती नही रूकती। ना विश्� read more >>
शीर्षक (मानवता) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) ना मन्दिर में ना मस्जिद में ना गिरजाघर में ना ही गुरुद्वारे में, मानवता दिखती है दिल के read more >>
शीर्षक (स्वतंत्रता दिवस) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) यू ही नही ये आजादी की खुशियाँ आयी है। इसके लिये शहीदों ने अपनी जान गवायी है। म read more >>
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