शीर्षक (मेघराज)
मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर)
हे मेघराज कब तक आओ गे ,
कब हम पर अपनी कृपा बरसाओ गे।
ऊपर से बरस रही है आग नीचे से धरती उगल र� read more >>
शीर्षक (वो बीते हुवे दिन)
मेरे अल्फ़ाज़ सचिन कुमार सोनकर
वो दिन बहोत याद आते हैं।
जब माँ के गोद मे बैठ के खाना खाते थे ।
पिता के कंधे पर स्� read more >>
शीर्षक (बारिश का मौसम)
मेरे अल्फ़ाज़
(सचिन कुमार सोनकर)
चेहरे पर खुशियाँ आती है काली घटा जब बदल पर छाती है।
झूम के पवन फिर गाती है ,
पेड़ो प� read more >>