इश्क की गलियों से होता हुआ
कितनी रसाकसी के बाद आज
पहुंचा हूं मुकाम पे....!
बहुत कुछ मिलने की उम्मीद में
सब कुछ गवा वैठा हूं...!
राह बदर रा� read more >>
अक्सर मैं दु:खी हो जाती हूँ ,
जब किसी दूसरी औरत को,
देखकर तुम्हारी आंखें विस्तृत,
हो जाया करतीं हैं तब....!
या फिर मेरी पीठ पर गढ़तीं हैं ,
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तुम खुश हो,
या दुखी,
मुझे नहीं मालुम,
क्योंकि
कई जमाने से,
तुम से नहीं मिला...
परन्तु मैं,
मैं हमेशा,
तुम खुश होगी,
यही मिथ्या
सोच कर,
रो� read more >>
पता नहीं तेरे दिल पर क्या लिखा था
हम पढ़ ना सकें
तेरे जहन में क्या चल रहा था
हम उतर ना सकें
तू थी और तेरा दीवाना पन
हम समझ ना पाए
कितनी उ� read more >>
मन के द्वार एक दीप धंरु मैं!
हृदय के तम को दूर करुं मैं!!
हो उजियारा चहूं ओर,
तन को सरावोर करुं मैं!
अटरिया के कमूरे पर दीप धरुं में
आस वि read more >>