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Uday singh kushwah

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My Articles

इश्क की गलियों से होता हुआ कितनी रसाकसी के बाद आज पहुंचा हूं मुकाम पे....! बहुत कुछ मिलने की उम्मीद में सब कुछ गवा वैठा हूं...! राह बदर रा� read more >>
अक्सर मैं दु:खी हो जाती हूँ , जब किसी दूसरी औरत को, देखकर तुम्हारी आंखें विस्तृत, हो जाया करतीं हैं तब....! या फिर मेरी पीठ पर गढ़तीं हैं , read more >>
तुम आना मेघ उमड़-घुमड़़ तुम आना मेघ, सहज-सरल तुम छाना मेघ। प्रीत का अमृत, तुम बरसाना मेघ, प्यास धरा की तुम बुझाना मेघ। उमड़ -घुमड़ तुम � read more >>
तुम खुश हो, या दुखी, मुझे नहीं मालुम, क्योंकि कई जमाने से, तुम से नहीं मिला... परन्तु मैं, मैं हमेशा, तुम खुश होगी, यही मिथ्या सोच कर, रो� read more >>
पता नहीं तेरे दिल पर क्या लिखा था हम पढ़ ना सकें तेरे जहन में क्या चल रहा था हम उतर ना सकें तू थी और तेरा दीवाना पन हम समझ ना पाए कितनी उ� read more >>
कुछ देर बैठ साथ ... आओ कुछ देर बैठ समय साथ बितायेंगे ख़ामोश बैठ कुछ दिल की बतियागें एक नयी दुनियां में खुद को पायेंगे करेगें बातें चांद read more >>
मन के द्वार एक दीप धंरु मैं! हृदय के तम को दूर करुं मैं!! हो उजियारा चहूं ओर, तन को सरावोर करुं मैं! अटरिया के कमूरे पर दीप धरुं में आस वि read more >>
ता-उम्र मोहब्बतें राह ताकता रहा उसकी, वे किसी गुलजार के गुल हो गये.....! आहिस्ता-आहिस्ता दाखिलें गिरफ्त जज्बात हुए, कमवख्त ख्याल उन पर न� read more >>
ऐसा मेरा गांव रे! कहीं पसरे -पनघट पर मेले कहीं आम की छांव रे! कहीं चौपाल पर वैठे, बतियाते गांव रे! कहीं धमा चौकडी़ कहीं धूम धधड़का ! कहीं read more >>
तुम सा मुकम्मल जहां मिला होता...! जिन्दगी खुशनुमार हो गयी होती! यू्.एस.बरी read more >>
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