मुखड़ा- दर्द दिलवा में जब जब उठी सनम,
रातियों के ना आखिया सुती सनम,
जाके हमरा से दूर रहबु रुठी सनम,
रातियों के ना आखिया सुती सनम
अन्तरा-1 � read more >>
कवि की न तुम कल्पना !
शायर की न शायरी !!
सूरज की न तुम किरणें !
चाँद का नूर नहीं !!
आँखे देख सब भूल गई !
किस नूर का तुम नूर हो !!
मधुशालाएं भी � read more >>