मन में बसा है ,
मन में बसा है, हर एक के मन में बसा है वो भगवान
जो सब में छिपा हुआ है वो मनोबल पर किसी को नजर नहीं आता।
किस कलियुग में जी रह� read more >>
( नज़र )
आज फिर आसमां में एक चांद खिला |
चांदनी में तन यह बतर हो गया ||
उसने शरमा के पलकें जो फेरी यहाँ|
बाग-बाग यह मेरा मन हो गया||
मेरे � read more >>
संसार की माया मिथ्या, झूठ का ना मोल ।
अब ग्यान पटल खोल माँ, ग्यान पटल खोल ।।
अवगुण भरे हैं इस तन में, अब गुण की भाषा बोल ।
अब ग्यान पटल खोल � read more >>