देखा मन हर्षशाया रातो मे, प्रेम की दीप जलाया साथो मे
गिरता उठता नहलाया बातो ने, उठा पटक धमा चौकड़ी हुआ सातों मे
मन का रुख काँप गया, पप्पू � read more >>
मेरे मन में एक सवाल आया कैसे मन ने इंसान को गुलाम बनाया ।
मन वश में कर न सके, अपनों के साथ रह ना सके।
खून ही हो गया खून का प्यासा अब किसी औ� read more >>