जाली मुखोटे हे यहा सारे,
हर कोई एक छलावा है!
दिखावे की अच्छाई ,
अंदर से ये काले है!
क्या डरना है गैरो से,
अपने ही लुटेरे है !
गैर तो लुटे स� read more >>
इस भीड़ भरे बाजार में,
हर एक चीज बिक रही है।
लगाए अपना मजार कहाँ,
कोई ठौर नहीं दिख रही है।
दर्द जो दिल में था कब से,
आज आँसू बन के पिघला � read more >>