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कौन सुनता है
तेरे बगैर दिल की बातें कौन सुनता है क्या तकलीफ है क्या पीड़ा है इस तकदीर का क्या किस्सा है रात रात भर जग के हरदम आंख के आंसू कौन पोछ�
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लक्ष्मी बाई
धधक उठी जब ज्वाला नभ में धूल भरा अंधियारा उपजा जब लक्ष्मी बाई का अस्त्र दुश्मन की सेना को गरजा शिव का डमरू दमक गया सहम उठा इंद्रासन
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तुम्हें छू के देख लूं
क्यू इंतजार रहता है आज कल नींद में आगोश हो जाने की जहां मुलाकात होती है तेरे चंचल नैनों से एक हवा के झोखों की तरह आकर यूं चले जाना ते�
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कितना अच्छा होता
काश हम तुम एक सफर में होते वो सफर जो खत्म ना हो सफर के रास्ते में वो प्यारी वादियां हो जो समेटने को तैयार हों अपने बाहों के आनंद में �
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तुम मेरे पास ही आओगे
भीड़ में एक चेहरा खोजते रहना मेरी बातों को याद कर रोते रहना जो हर पल तुझे चाहत की सौगात दे ऐसे तबस्सुम को पूजते रहना बिछड़ के मुझसे ए�
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प्रदूषण
कविता-प्रदूषण नभ जल थल पर जगह जगह पर प्रकृति के हर कोने कोने पर्यावरण प्रदूषण तीन सुखमय जीवन है रहा छीन। हे मानव खुद स्वार्थ में अ�
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मैंने सिखा है!
मैंने सीखा है बहती नदियों से पर्वत चीर के राह बनाना जीव-जगत की प्यास बुझाकर पारावार में लीन हो जाना मैंने सीखा है दानी वृक्षों से अप
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रौनक (प्रेम पर कविता)
कविता-रौनक (प्रेम पर कविता) फिर वही रौनक बचपन की, ताजा हो गयी देख कर अचानक बहुत दिनों बाद शादी के महफ़िल में, निकल कर आगे देखी पलट कर ज
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मेरा गांव
मेरे गांव की अमर बलिदानी मिट्टी। मेरे पूर्वजों की अमर कहानी। मेरे पूर्वजों का इतिहास दबा हुआ मत पूछो ऐसे बलिदानी। जिन की अमर कहानी।
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पृथ्वी
विश्व पर्यावरण दिवस पर इस वर्ष की थीम पृथ्वी (भूमि )पर कविता * पृथ्वी * हमें भूमि और प्रकृति को मूल रूप में लाना होगा । लि
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क्यों डरु मैं काल से
बक्त हैं की रुकता हैं दुःख हैं की टलता नहीं जख्म अभी तजा हैं एक समय है की बदलता नहीं सदियां गुजर गई कितनी घड़ियाँ गुजर गई न ये बदला म�
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ये ऋ सुन तो
ये ऋ सुन तो दिल में कुछ तो होता हैं तुझे न देखु तो नैना बिचलित होता हैं ये ऋ सुन तो मुझ मे तू ही रहती हैं नहीं तो क्यों होता बेचैन मैं
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