जब तू था दिल में
तो तु ही था
अब जब तू नहीं तो
तू भी नहीं
जब तू था तो इश्क भी था
प्रीत संगीत संस्कृत मीत भी
अब जब तू नहीं तो ये सब
पल पल ह� read more >>
दो पल की जिंदगी हैं,
आज बचपन ,कल जवानी,
परसों बुढ़ापा, फिर खत्म कहानी है।
चलो हंस कर जिए , चलो खुलकर जिए ,
फिर ना आने वाली यह रात सुहानी,
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दोहा छंद "सद्गुण"
सद्गुण सरस सुगन्ध से, महकायें जग आप।
जो आयें संपर्क में, उनके हर लें ताप।।
अंकुश रहे विवेक का, यह सद्गुण सिरमौर।
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