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नहीं ज्ञान जिस विषय का, उस संदर्भ में कुछ कहना । विकल्प नहीं कोई, खामोशी से बेहतर है ।। भुलाकर गमो के पल को, सीखो आज में तुम जीना । जिं� read more >>
प्रकृति किलेबंदी नदी नहरो से वो सिंह द्वार है मैं यहीं का हूं नहीं शिखरो से है अभिनंदन करने दो शेर खड़े कोयल गाती स्वागत गीत और नृत� read more >>
ओ! मेरी लाड़ली ओ! मेरी नन्ही परी डरी थी मैं जब तु आई थी परी डरे थे तेरे बाबा भी तु जब आई थी परी ज़माने की गंदी निगाहों स read more >>
कविता-ख्याल ख्याल आता है क्षण भर के लिए न जाने क्यों रुकता नहीं पल भर के लिए भूलता नहीं भूल पाता नहीं हूं वह रिस्ता जो पहली बार पहल� read more >>
सच्ची है, नहीं तकिया- कलाम। गुलामी, तुझे सलाम। कोई धर्म का, कोई कर्म का, कोई शर्म का गुलाम है। कोई आदत का, कोई मत का, कोई हरम का गुलाम है। क read more >>
जवानी बेदाग़ गुज़र जाए, उसे ही गुज़रना कहते हैं। उम्र के अनुसार सुधर जाए, उसे ही सुधारना कहते हैं। घर पर अपनों के बीच मरे, उसे ही मरना क� read more >>
शीर्षक (माँ की ममता) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) इस धरती पर जब मै आया गोद म read more >>
गर माँगने से सबकुछ, मिल जाती हमें खुदा से । तो इस जहां में कर्म की, कोई प्रधानता ही ना होती ।। मशगूल होते हम सब भी, बस दुवा मांगने में । read more >>
सफलता तो कभी कभी मेहनत न करने वालो को भी मिल जाता है, यही तो भारत का दुर्भाग्य कहलाता है। 60% लाने वाले सरकारी दफ्तर में बैठे है, 90%लाने वा� read more >>
कल, कल हो क्यों नहीं जाता? मैं वर्तमान में, रह क्यों नहीं पाता? अनाहूत, ज्यों नटखट बच्चे। दबे पांव, ज्यों देकर गच्चे। सूरजमुखी, ज्यों सू read more >>
एक प्रश्न --------------- एक प्रश्न उठा मेरे मन मस्तिष्क में , और मचा रहा भूचाल ये है। आजाद हुए हमें हुए वर्ष पचहत्तर, फिर भी हमारे देश � read more >>
अन्त हुआ एक युग का ---------------------------- अन्त हुआ एक युग का, जैसे ही अनात्म हुई सुश्री लता। रहे गयी बस यादों में हम सबके । गीतों में अमर हुई स्व read more >>
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