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बहुत दिनों जो थें परतंत्र , लड़ी लड़ाई हुएं स्वतंत्र , लागू हुआ है तब जनतंत्र , भारत बना‌ है अब गणतंत्र। इस शुभ दिन की चाह में , देशभक्� read more >>
है तृप्त वेदना भारत कि, कल - कल, कल - कल रत्नेश बहे! यहां धरा के र्जर्रें - र्जर्रें में, मातृ प्रेम का धार बहे!! रस भर जाता हैं कवी � read more >>
यह रूप मेरा है ऐसा प्रिय तुम्हें दिखा न् सकती हूँ। मेरे मन की पीड़ा प्रिय मैं तुम्हें सुना न् सकती हूँ।। फीके पड़ गए रंग मेंहदी के इसे स� read more >>
पराक्रम दिवस है आज पराक्रमी की याद में, सारे शब्द बोने हैं तेरी महिमा के नाद में। ग्यारह बार जेल गए थे, फिर भी आजाद हिंद फौज के नेता थे� read more >>
मनुष्य कई गुणों की खान। मानव के जीवन में, चरित्र मूल्यवान्। धन लुटा, कुछ नहीं लुटा, समय लुटा, तो लुटा कुछ। चरित्र लुटा, सब कुछ लुटा, मनुष read more >>
कर निर्माण नीड़ो का और कहीं/ पतझड़ का मोसम जो बीत गया, पत्तों का रंग तो सूख गया, अंधेरों का कल में सोर नहीं, कर निर्माण नीड़ो � read more >>
धान उगेंगे मेघ गरजेंगे देखना गगन तुम जरूर/ बादलो को सूरज से पिघलाएंगे खेतो को पानी से नहलाएंगे, धान उगेंगे मेघ गरजेंगे देखना गगन तु read more >>
यह रूप मेरा है ऐसा प्रिय तुम्हें दिखा न् सकती हूँ। मेरे मन की पीड़ा प्रिय मैं तुम्हें सुना न् सकती हूँ।। फीके पड़ गए रंग मेंहदी के इसे read more >>
रह गई बंद अंधेरो मे न मिला रोशनी का चिराग कोई/ बुझ गई थी ढिभरी उसकी क्यो न आया जलाने कोई, उदास था मन जिसका वह थी बूढ़ी चन्दा, रह गई बंद अ� read more >>
खो जाती हूँ मैं कभी-कभी गुज़रे दिनों के ख्यालो में ... क्या होता अगर जी रहे होते हम आज भी अंग्रेजो के ज़माने में ... चाबुक खाते, धूल फ़ाख्ते � read more >>
गहरी अंधेरी रात के बाद, सुहानी भोर आती है जेष्ठ की तपिश के बाद, घटाएं घनघोर छाती हैं 'यह भी नहीं रहेगा' का भाव, दुःख का दुःख भुलाता है तू� read more >>
कुछ संकल्प नया, कुछ प्रकल्प नया तब अफसोस न होगा कि एक साल गया बीते साल कि कुछ गलतियां, या कुछ गलतफहमियां भुला दूं भीतर में जमीं वहमिया read more >>
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