"अरि ओ"...चल संभाले दामन अपना
दाग तनिक न लगने पाये
कुंठाओं से ग्रस्त मनुष्य
तन को तेरे नोच न खाये
गड़ी है आँखे आज अगर,
तुझपे कुछ य� read more >>
आप की ख़त को ,आज पढ़ रहा हूँ।
इतना लिखी हो ख़त ,,की सुबह-शाम पढ़ रहा हूँ।।
इक़्श में बीते सुख-दुःख आज ख़त में पढ़ रहा हूँ।
जो बीत था पल इक़्श का ,व� read more >>
ये बेटियां,
घर की महकती कलियां,
ये ही तो हैं जो खुशी में भी रुला जाती हैं
ये ही तो हैं जो हर गम को भुला जाती हैं
खुद के सपने भी पिता की औ� read more >>