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बड़ों के आगे बच्चों का सीना तनते देख रहा हूँ अपने इस गाँव को मैं शहर बनते देख रहा हूँ देख रहा हूँ रोग बड़ा ये जवानी हो गया है रगों में बह� read more >>
# सुप्रभात.... जो चाय , सुड़क कर पीते ...! जो दारु , जाम पे जाम ...! छल्ले उड़ाते , कश लगाते हुए जो लेते , प्रभु का नाम ...! जो ना छोड़े ये आदत ...! � read more >>
टूटी मेज़ और जली किताबें रह जाएँगी ड्रोन गिरेगा अम्न की बातें रह जाएँगी लड़ने वाले रौशन सुब्हें ले जाएँगे मेरी ख़ातिर अंधी शामें रह read more >>
1 कल्पों कि साध्नाओं कि छबी, ज़िसनें विखंड में भर डाला! चल पथ कि राह आज़ादी को, अखंड स्वप्न का नीव धरा!! 2 भारत्त के लाल वो ल� read more >>
मन्द - मन्द चल रही हवा, और शुश्क - शुश्क शीत्तलत्ता था! टपक रहीं थी शुधा कि बुन्द, मेरा मन स्वदेश में डुबा था!! सोंच थी गहरी सोंच read more >>
कविता = (अखण्ड भारत ) हिंदी तब मातृभाषा कहलाएगी ! जब हिंदी घर-घर पूजी जाएगी !! सरकारी महकमों में हिंदी ! जब लिखी बोली जाएगी !! भाषाओं की तु� read more >>
मैं यह जीवन समर में दुनिया को छोड़ चला... क्रोध मोह माया के चलते मै अपनों को छोड़ चला! मैंने सोचा बहुत कुछ पाया पर मैं सिर्फ खोया ही � read more >>
#हिंदी दिवस //...मेरी भाषा हिंदी...// भारत देश है मेरा ऐसा पूरी हो या आधी , जहां विभिन्न भाषाएं बोले यहां की आबादी.....! मद्रासी,तेलुग� read more >>
कलम का आगाज ,कुछ ,इस ,तरह से हुआ,। बोली ,कलम ,कागज ,कहीं ,लहुलुहान ,मुझे ,निहारता, आखिर ,ऐसे ,शब्दों, से ,कहाँ,मेरी ,और तस्वीरें,बनाओगे तुम,। इ� read more >>
ऐसा मेरा गांव रे! कहीं पसरे -पनघट पर मेले कहीं आम की छांव रे! कहीं चौपाल पर वैठे, बतियाते गांव रे! कहीं धमा चौकडी़ कहीं धूम धधड़का ! कहीं read more >>
गर साथ देती तो जरा, सफर आंशान हो जाता, बहुत मुश्किल होता है सफर अकेले तय करना जिंदगी का ! यू.एस.बरी ग्वालियर मध्यप्रदेश read more >>
कभी तुम से_ तो कभी अपने आप से दिल की गहराई से, मिला करतें हैं! हर रोज, वनाया करतें हैं सपनों का महल, हर रोज गिराया करतें है! यू.एस.बरी ग्� read more >>
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