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Maa
मुझे पता तो नही मै कैसा हू या मेरा आपके साथ व्यवहार कैसा हैं ...... पर आप तो मेरी दुनिया हो आपके बिना तो मैं कुछ भी नही आपको बता तो नहीं सकता �
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गुनाह
गुनाह दयानंद हैरान-परेशान है। उसे समझ में नहीं आ रहा है कि तमाम कोशिशों के बावजूद उसे अपने काबिल बेटों के लिए बहुएं क्यों नहीं मिल रही
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Shayari
सही है तुम दुर हो, नहीं तो यह एहसास ही नहीं होता कि कोई दोस्त इतना करीब है।
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फिल्मी दुनिया
पसंद हे मुझे वो फिल्मी दुनिया जहाँ आखीर में सब अच्छा हो जाता है असल जिंदगी में तो अक्सर मौत आ जाती है । 😔😔😔 - समीर लांडे
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तुम्हारे नाम किसी और को
की तूम्हारे नाम किसी और को मॅसेज जाने लगे कैसा जादू कियाँ है हर तरफ तुम नजर आने लगे - समीर लांडे
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दीपावली के दीप
दीपावली के दीप ( दिपावली पर कविता) जुगनू सा जले दीप तो समझो दिवाली है मन में जगे जब प्रीति तो समझो दिवाली है दुश्मन हो या हो गैर बैर ना �
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🔦...पथ आज़ादी कि...🕯
है ऊम्मिदों कि शांख सृज़ना, चाहत्त है आज़ादी कि! और वशुधा को नाप चली, मानव पद पथ आज़ादी कि!! त्तट, त्तरूण,तृण, पाहन, अवत्तल,
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*🌳प्रेरक कहानी🦚🌳 *💐💐कलियुग-धर्म💐💐* सपनों का सौदागर.....करण सिंह
👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌 *🌳प्रेरक कहानी🦚🌳 *💐💐कलियुग-धर्म💐💐* सपनों का सौदागर.....करण सिंह 👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌 पहाड़ की तराई में एक
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कहो! उर्मिला
कहो! उर्मिला... कहो! उर्मिला... महलों का वैभव, कितना दारुण दुःख तुमको देता रहा? विरहा की अग्नि, कितना तुमको महलों में जलाती रही? कहो! उर्�
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पांच पर्वों का समाहार है दीपावलीः
पांच पर्वों का समाहार है दीपावलीः जिस तरह फूलझड़ियों से लड़ियां बनाई जाती है और दीपों से दीपमालाएं; उसी तरह पांच पर्व मिलकर दीपावली कह�
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देश हे अपना
देश हे अपना अपना वतन भी। झण्डा हे ऊँचा ऊँचा गगन भी। ऊँचे हे हौसले छूले गगन भी। हे देश अपना अपना वतन भी। सजदा करें।�
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मैं हूं समय
मैं हूं समय प्रकृति-अटल, तीन लोक-उजागर। मैं प्रेम संपूर्ण-शांति, हूं धरती में-धाम।। मैं हूं समस्त-सर्वेश्वर, सब में व्याप्त-व्यापक।
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