कल्पना करते हुए____________
प्रभु धनवंतरी जी को बुलाते हैं
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दीपावली आ गई,चलो मिलकर घर को सजाते हैं,
धन तेरस के दिन, प्रभु धनवंत� read more >>
में पतझड का मौसम हू तुम बारिश बन बरस जाओ
मे लिखता रहू उम्र भर , तुम कविता बन उभर आओ
भले रुठे हो शब्द मेरे, तुम यु दिल की बात समझ जाओ
मेरी ज read more >>
आज की युवा पीढ़ी खुद को भूल रही है ।
प्रेम की झूठी परिभाषा में खुद को तोल रही है ।
निज जीवन के कर्तव्यों को भूल गई है ,मात पिता के बलिदानो � read more >>