मेरे पुत्र कार्तिक बंसल को समर्पित मेरी यह रचना
कविता = ( कल की कहानी )
तुझमें अपना बचपन देखा !
तुझमें अपनी जवानी !!
तुझमें गुजरा कल है द� read more >>
सत्य चमकता है सितारों में कहीं उसकी रोशनी बयां करती है ,है वजूद उसका आसमां में कही। ********सत्य चमकता है सितारों में कहीं दूर होते हैं सित� read more >>
खुद ,से नजर झुका के
आईन से मत ,पुछ - के खूबसूरत है ! क्या तू .....
कह ,दे 'अपने दिल से अपने' ,
के 'कोई तू भी,'
अपना मुकाम बना ले ।
फिर खुद जमाना कहे � read more >>
कुदरत पनपता है हम सभी के बीच कभी मीरा बनकर तो कभी सरहद का शहीद उसके महक का पता होता है कुदरत को हर पल भूल जाए जमाना चाहे उसे कहानी समझ कर � read more >>
बडे ,असान से शब्दों मे ' उसने कहा -
"जरा पास तो बेठौ "
ओर
"आज कल "क्या करते हो ?
फिर
"एक टक निगाहो से देखने लगी मुझे "
ओर सन्नाट� read more >>