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छांव में धूप की रोशनी है, उज्जलों में तेरी गजरती है,कई रास्ता हवाओं में रेह जाती है, नमी तेरी इस मीट्टी के कण-कण में, धरती का श्रंगार| हि read more >>
अंधेरों में शाम की तलाश तेरी फिजाओं में गुमसूम सी आवाज तेरी मौजूद है, जिंदगी में सभी कैद हुऐ हम जंजिरो में अरमानों में रोशनी तेरी फि� read more >>
कविता -मन के मुलायम चल कर अपने जीवन पथ पर बदला समाज अपने बल पर निज प्यार लुटाया कर भरकर की राजनीति खूब चढ़ बढ़कर अर्पित है सुम� read more >>
तुलसीदासजी ने रामचरितमानस में शरद ऋतु का गुणगान करते हुए लिखा है- बरषा बिगत सरद ऋतु आई। लछिमन देखहु परम सुहाई॥ फूलें कास सकल महि छाई� read more >>
दहेज की आग एक रसोई से धुआँ उठा, आग लगी, लपटे बाहर निकली, शोर में कुछ चीखें चिल्लाती, भीड़ में लोगों की कानों आयी, बचाओ-बचाओ, कोई बचाओ, आग read more >>
भबिष्य के बारे मैं जो नहीं सोचता, बो बर्तमान मैं ही रह जाता है, बाद मैं आगे पश्चताप करने के अलाबा उसे कुछ प्राप्त नहीं होता है ! read more >>
रास्ता जैसा भी उस पर चलना चाहिए, रिस्ता जैसा भी होगा उसे निभाना चाहिए! read more >>
मा तो सबकी प्यारी है ये तो सबसे न्यारी है। मा के जैसा कोई नहीं है ये कहती दुनिया सारी है।। मा तो कभी भी कुछ ना कहती वो तो हमेशा चुप ही रह read more >>
कविता -तुम कैसी मां हो? फेंक चलीं क्यों ?दिल रोता है! कूड़े में अब दम घुटता है! अंदर ही अंदर दहता है! कितनी विह्वलता है ! मां की read more >>
दूसरों के बारे में तो हम बहुत चाव से और बहुत ही उत्सुकता पूर्वक बातें करते हैं उनकी अच्छाइयां उनकी बुराइयां परंतु कभी-कभी हमें स्वयं क read more >>
हमारी जिंदगी भी एक किताब की तरह होती है जिसमें मुझे यह नहीं पता होता है कि अगले पन्ने पर क्या लिखा होगा और हमें क्या ज्ञान प्राप्त होगा read more >>
न जाने क्या देखा मैंने उसकी आंखों में जो आज भी उम्र के इस दौर पर याद करके दिल को बेचैन कर देती है read more >>
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