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"जूतो का शहर"
एक दिन मैं गया जूतों के शहर में, भीड़ थी भारी, हर एक पहर में। कहीं बूट चमचमाते, कहीं चप्पल मुस्काती, कहीं सँडिल की अदाएँ, दिल को लुभाती।
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"जूतो का शहर"
एक दिन मैं गया जूतों के शहर में, भीड़ थी भारी, हर एक पहर में। कहीं बूट चमचमाते, कहीं चप्पल मुस्काती, कहीं सँडिल की अदाएँ, दिल को लुभाती।
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सपनों का बाज़ार
दुनिया खरीदने निकला था सपनों के बाज़ार में, कुछ लम्हे ही ले पाया, बाकी सब महँगा था। चाँद-सितारे बिकते थे हकीकत के सिक्कों पर, मोहब्बत क
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तेरी मोहब्बत के बगैर,...
तेरी मोहब्बत के बगैर, खाली है मेरे दिल की तिजोरी तू अगर भरने की कोशिश करो तो, मैं उम्र भर संभालने की कोशिश करूंगी
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गौ माता
गौ रज पड़े पड़े शंकर रज। देव धारा में आ जाएं।। नमन करु नित शीश झुकाकर। धन्य भाग मां गौ पाएं।।
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मैं राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हूँ
मैं राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हूँ मैं तिरंगा कहा जाता हूं 7 अगस्त 1906 को मुझे पारसी बागान में लाया गया हरी पट्टी पर कमल के फूल रखे पील�
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Uska ehsas
--- "दिल और दिमाग की बहस" कभी दिल कहता है— उसकी अच्छाई लिख, उसकी वो बातें जो तुझे मुस्कुराने पर मजबूर कर देती हैं… पर दिमाग टोक देता है—
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मेरी छत के नीचे अब नहीं भीग सकता
मैं आ गया मेरी छत के नीचे अब नहीं भीग सकता राह में भटक गया था इस तरह जैसे कि में दुबारा खड़ा नहीं हो पाऊंगा आवाज आई पिता का साया है अ�
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मेरी मां की निगाहें
मेरी निगाहें मेरा कर्म देखती हैं है मेरा सफर अजीब मेरी मां देखती हैं हर ढलती शाम को किया किनारा मेरी निगाहें हर गिलास में जाम देखती �
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मेरी किताब मेरे सपने
मुझे रात भर जगाया मेरी किताबों ने मेरे ख्वाब को तोड़ा मेरी किताबों ने में सोया रहा वो जागती रही मेरे अल्फ़ाज़ में में कहूं मुझे चा�
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मेरे हौसले
मैने उड़ान भरने की सोची मुझे मेरे पंखों पर भरोसा था मैने तीर चलाए अपने हौसले से मुझे खुद पर भरोसा था
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बी. ए. और वो
सोनू के पापा की गोलगप्पे की एक छोटी सी दुकान है उसी से घर का सारा खर्च चलता है सोनू का एक छोटा भाई और एक बहन है सोनू अपनी जिंदगी में कुछ अ�
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