महफिल का मजंर में समझ नहीं पाता,
लोग मुझे बुरा कहते है,
लेकिन फिर भी मेरी ही बाते करते है,
यह कैसी अजीब बात है,
लोग मेरी बुराई सरे आम करत� read more >>
में समझ नहीं पा रहा हूँ,
की में महफिल में आम हूँ या खास हूँ,
जब लोग मुझ से मिलते है,
तो ज़्यादा रूख न देकर मुझे आम कर देते है,
लेकिन जहां भी read more >>
नसमझ था में के जिंदगी का,
बड़ा तजुर्बा है मुझे,
लेकिन इतने लोगो को,
अलग-अलग तरीके से,
धोखे देते हुए देखा,
तब जाना अभी तो मेंने,
कुछ सीखा ह� read more >>