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मजदूर आज मजबूर है
राष्ट्र निर्माता मजदूर आज मजबूर है,दर –दर की ठोकरे खाकर घर से दूर है | न रहने का आशियाना न घर का ठिकाना,सब कुछ सहकर भी परिवार से दूर है|
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याद उन्हीं की आती होगी
सखिया जब कहती होंगी याद उन्ही की आती होगी । उनसे मिलने को जी करता होगा पूछो तो हंस कर रह जाती होगी । फिर वो शर्मा
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तुझे भूल गए रे ,यारा
तुझे भूल गई रे ...... यारा, मैं तो दीवानी सोच के बैठी हूं। तुझे भूल गए रे.... यारा ,मेरे मैं तो दीवानी सोच के बैठे हूं । बाहें, तेरी बन गई थी मे
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मेरा बचपन लोटा दो
बात बड़ी छोटे मुह लेकिन ,जब के लोग विचारों। मुझ पर लदी किताबें अब मेरा बोझ उतारो। झरनों को तो जंगल में झरने की आजादी। पर मुझे नहीं म�
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मैं हूं बहुत आभारी
मैं हूं अपने शिक्षक की आज्ञाकारी मैं हूं उनकी शिष्टाचारी, उन्होंने ही तो ज्ञान दिया मैं हूं उनकी बहुत आभारी। मैं हूं अपने पापा की प्
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बाल दिवस
बच्चों का दिवस है आया, ढेर सारी शुभकामनाएं है लाया। नेहरू जी थे बड़े महान, सबने दिए इन्हें सम्मान। नेहरू जी का जन्म प्यारा, बाल दिवस �
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मोबाइल
कहां गई वो परिवारों की बातें कहां गई वो रिश्तेदारों के रिश्ते-नाते, बड़े कहां अब वैसा इज्जत पाते वो दिन कहां जब बच्चे पेड़ के पीछे छिप�
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सच्चे मित्र
मित्रता बड़ा अनमोल रतन है, इसमें खत्म सारा चिंतन है। पास न आए कोई दुख-दर्द, इसे सहने वाले मेरे मित्र हैं। जब मैं भटक गई कुमार्ग पर, तब �
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ईरण ईमानदारी
जब तक मौक़ा नहीं मिले, पहनें ईमानदारी का चोला। मौक़ा मिलते ही झोले से, निकले बम का गोला। काम सरे तो खूंटी टांग दें, ईमानदारी का झोला�
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क्यों हुँ? मैं लाचार
क्यों हुँ? मैं लाचार ये उठा मन में विचार कर सकता हुँ बहुत कुछ पर मज़बूरी है। मुझ पर सवार तैर सकता हुँ पर कहाँ है। मेरी पतवार क्यों हुँ
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कहां वो जाते होगे
सुबह सुबह निकल पड़ते है। दिन ढलने पर आते है। बढ़ते तापो मे इतनी गर्मी में कहाँ वो जाते हो�
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श्रेय
अगस्त 1992 का हर दिन एक इंतज़ार था। दसवी बोर्ड का रिजल्ट जो आनेवाला था।बिहार बोर्ड की दसवी परीक्षा पास करना,जिसे मैट्रिक की परीक्षा कहा �
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