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ऐसे तू सामने आया न कर... तेरे जाने पे आँखे, तुझे देखने को तरसे... ख़ुशी तो बहुत, पर आँखे नम कर जाती है... ये आँखे पूर� read more >>
हे! कलम लिख हे! कलम तू झूठ को झूठ सांच को सांच लिख, तेज तलवार से भी तेज बात को बात लिख। सफ़र हो दूर कितना भी मगर जज़्बात लिख, भरोसे से � read more >>
अपने इस,दो दिन के इस प्यार में ...२ जीवन बसे हैं ! हजार.......! हर मोड़ पे हम....... फिर मिलें हैं।यार........! अपनी मुहोबत, दुनिया देखें अपना प्यार......! � read more >>
मैं दीवाना बना दूं तुझे तेरे पास रह-रह कर -.......! बांहों में तेरी गुजरो हर सुबह शाम हूं मैं तेरा आशिक पगली ये कह कर - कर...........! मैं दीवाना........ read more >>
(ऑफिस के किस्से ) हास्य कविता ऑफिस में हम गए थे बड़े शान से, सोचा था कि बुढ़ापा कटेगा आराम से। पहला दिन जब पहुँचे हम वहाँ, बॉस ने दे दि� read more >>
सावन का मौसम आया फिर याद तुम आए हो जितना दूर करती हूं तुम्हें खुद से उतना ही करीब आए हो Saawan ka mausum aaya Phir yaad tum aaye ho Jitna dur karti hun Tumhen khud se Utna hi karib aate ho ओ पह read more >>
तेरी जिंदगी से जा रहे हैं हम इल्जाम ना देगें तुम्हें हम जो बीत गई वो अतीत थी हमारी यही सोचकर चल देगें आगे तेरी यादों से भी दूर हम तेरी read more >>
तुझसे शिकायत करूं भी तो कैसे करूं तू तो मेरा होकर भी मेरा नहीं है तुझपे हक जताऊं भी तो कैसे जताऊं तू तो मेरा होकर भी मेरा नहीं है तुझप read more >>
भीष्म तेरी प्रतिज्ञा क्या.....? तेरी गौरवगाथा के काम आई मृत्यूस्या पर लेटे-लेटे प्रायश्चित के आंसू ....से शन्न था हृदय जीवन में क्यों प read more >>
हाल अपना सुनाया करो, आते हो ख्वाबों में कभी मेरी हकीकत भी बन जाया करो, आंसुओ की हो वजह तो कभी खुशी की भी बन जाया करो। वक्त का पहिया घूम ग� read more >>
पर्व, अपना , ये पावन देखों .....! मेरे भारत में सावन देखों.....! रिमझिम- रिमझिम बारिश की बुंदों में इठलाती - बतियाती खिलखिलाती सुन्दर - सुन्दर read more >>
बसंत बहार की न जाने क्यों हर साल ये हजारों फुल खिलाती है ।। पेड़ो की हरी-हरी टहनियों पर भंवरों को बुलाती है ।। ये आदत इस की या कोई शौक � read more >>
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