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माता मैं भी बुद्ध बनूंगा
"बुद्ध बनूंगा" ज्ञानवान आत्म का स्वामी तपकर अंतर शुद्ध बनूंगा माता मैं भी बुद्ध बनूंगा घटा कोप इस कालखंड को चीर भोर का पुष्प खिलूंग
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"આવડતનું સરનામું"
માત્ર બેસી રહેવાથી કંઈ વળતું નથી, પરસેવો પાડ્યા વગર ભાગ્ય ખૂલતું નથી. ડિગ્રીના કાગળ તો માત્ર એક રસ્તો છે, આવડત વગર મંજિલનું સરનામુ�
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जिम्मेदार बन
जिम्मेदार बन जब तू अश्रु बहाना चाहे, रोक लेना उसे, कंही बाहर ना आ जाए, अंतरात्मा को अपनी तुझे, उस अश्रु बिंदू से ही स्वच्छ करना होगा, त
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लगता है इंसान होना पाप से है कम नहीं
लगता है इंसान होना पाप से है कम नहीं तार है इंसानियत इंसान को है गम नहीं क्या सही है क्या ग़लत न तौलता इमान को मार कर इंसानियत को पालत�
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शायद ......!! हम किसी के लिए इतना इंपॉर्टेंस भी नहीं है
शायद ......!! हम किसी के लिए इतना इंपॉर्टेंस भी नहीं है जितना हम समझते हैं यही हमारी गलती है कि गलतफहमी में जीते हैं...!! धन्यवाद
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जो मुझे नहीं समझा
जो मुझे नहीं समझा वो मेरी खामोशी को क्या समझेगा ...!! जिसे हर बात पर गलत मैं...... लगी वो मुझे क्या सही समझेगा..!! धन्यवाद
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किसी से कोई शिकवा नहीं......
किसी से अब कोई शिकवा नहीं,गिला नहीं...... जो मेरा नहीं था शायद वो मुझे मिला नहीं....!!!
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मैं यथार्थ सत्य हूं
"रूह"मैं क्षणिक क्षण भुंगर नहीं मैं यथार्थ सत्य हूं किन्तु तुमको दीख ता जो मैं वही असत्य हूं' हूं चराचर में रमा क्या कोई मुझको जानता ह�
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छप्पर वाले यार पुराने आंगन में
छप्पर वाले.... छप्पर वाले यार पुराने आंगन में औस टपकती रात सिराहने आंगन में चादर में ढकता हूं तन जैसे तैसे कैसे सोऊं रात बिताने आंगन मे
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कभी छोड़ कर नहीं जाऊंगा..!!
अजीब है ना... कल जो कहा करते थें कभी छोड़ कर नहीं जाऊंगा..!! आज छोड़ के जाने के कतार में सबसे पहले वही लोग आते हैं..!! Thanks
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जो चला गया उसके लिए रोना क्या..??
जो चला गया उसके लिए रोना क्या..?? जो है उसे संभाल कर जीना सीखो..!! धन्यवाद
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क्यों तरसता तरसता सा है आदमी
"क्यों तरसता तरसता है आदमी", इस बड़े शहर की क्या कहूं दास्तान ना पेट में खाना है ना है सर पे मकान तन पे कपड़े नहीं सामने है दुकान कैसे ज�
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