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हम चार सहेलियां
हम सहेलियां हैं चार हमें नहीं है किसी का डर आपस में है प्रेम की एक डोर साहस भी है हम में अपार।। जब भावनाएं करती हैं अनेकों प्रहार कभी �
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अपनी आदत बदल डालो
जब कोई तुमसे रोज रोज बातें करने लग जाए और तुम्हें उसकी आदत होने लगे तो उसी वक़्त ये आदत छोड़ दो...!! धन्यवाद
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आई बरसात
आई बरसात बहुत ही सुंदर अंदाज में l मौसम को कर सुहाना गीत गाई साज में l इंतजार था सबको गरमी कब दूर होगी _ एक खुशी आई है अब सबकी आवा�
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बेटी सिया समान
सरसी छंद मुक्तक मातु पिता तब धन्य लगे जब ,बेटी सिया समान l सदा निभा पति धर्म चले जो,बनती पति की आन l बने अमर इस भव्य जहां में,लेती ना
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पापा आप स्मार्ट हो गये हो
आधुनिक जीवन शैली में पापा आप भी ढ़ल गये हो पापा आप चेंज हो गये हो पापा आप स्मार्ट हो गये हो ।। आप साईकिल में चलते थे फोर व्हीलर अब चला �
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रात सा अपना नाम
कहते थे कि अपने नाम का असर अपने जीवन पर न होने देना रात सा अपना ये जीवन न कर लेना अंधेरे में खोना नहीं अपना हुनर अंधेरे से ही पूरा होता �
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रात्रि हो निशा हो
कहते थे कि अपने नाम का असर न होने देना रात सा अपना ये जीवन न कर लेना खो नहीं देना यू ही अपना हूनर अंधेरे सा अपना जीवन न कर लेना।। तुम ऊष
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लिखना आज है जाना
बरसों पहले यही सोचती थी कि लोग कैसे इतना गहरा सोचते है कैसे लिख लेते है सागर जैसे अल्फ़ाज़ आज आप ही लिख रही हूं ।। तब जाना है कलम की इ�
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स्वयं को पहचान
क्या खोया क्या है पाया जमाने ने यही गिनवाया आते हैं सब लोग अकेले ही फिर भीड़ में चलना क्यों सिखाया।। अपनी पहचान अपना अस्तित्व मिटे �
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इस जीवन की कहानी
मन मे है विश्वास असंख्य जीवन का सार है संख्य मानव के दिल की जुबानी कुछ यादें मीठी,कुछ है पुरानी इस जीवन की यही कहानी।। कहते है कि आं�
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संघर्ष की कहानी
वह दौर था 1951 का, कल्याणबीघा के गाँव में जन्मे थे जी। बचपन से सपना लिए थे, सुधारेंगे बिहार को एक दिन जी। किस्मत को कुछ और मंजूर था, पहुँच�
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मन मे विश्वास
कभी कभी दिल उदास हो जाता है जब हो जाए सपने अधूरे मन मे दबी आस रह जाती है अपने हो जाते है बेगाने लगते है सब अनजाने फिर कही से आवाज है आती
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