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सबकी बेटी एक सी-ऐसी रखें निगाह जिससे रौनक है यहां
(दोहा छंद) सबकी बेटी एक सी,ऐसी रखें निगाह। जिससे रौनक है यहां,निकले कभी न आह।। सबकी बेटी एक सी,इसको रखिए याद। दुनिया लगे हसीन तब,जाए बन
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खोल दो वह द्वार-जो प्रतिष्ठा तुमने मिल जाने की है
जो कहना है अपने मन से तुम्हारे मन तक है। शिथिल होती हैं इंद्रियां अंग पुलकित हो रहा संग मुस्कुराने को नयन कहते हैं दिदृक्षा मिट न जान�
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ज़िद से व्यक्ति का स्वाभिमान टूट जाता है
"ज़िद एक ऐसा स्वभाव है जो... व्यक्ति का स्वाभिमान तोड़ जाता है" -मोती
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ज़ख़्म तन के भर जाते-जीवन भर दर्द देते-दिल के ज़ख़्म
ज़ख़्म तन के- समय उपरांत भर जाते हैं। ज़ख़्म दिल के- यारों, जीवन भर दर्द देते हैं।। -मोती
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मेरे पापा जी मेरे प्रवरडीगार है-मेरी सांसें भी कर्जदार है
मेरे रक्त का हर कतरा कतरा🌹 यहां तक कि मेरी सांसें भी कर्जदार है मेरे पापा जी आप तो मेरे परव♥️र डीगार है जीवन मे सबसे ऊंचा है दर्जा आप�
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सब उदास हैं आज-ये वादियां ये घटाएं और चहकते हुए पंछी
आज सब उदास हैं। ये वादियां,ये घटाएं और चहकते हुए पंछी। आज सब उदास हैं। गुनगुनाते हुए भौरें, उड़ती हुई तितलियां और,खिलती कलियां। आज �
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बर्दाश्त- दुख दर्द अपमान मुसीबत सब बर्दाश्त करके यह दुनिया झुकानी है
कमजोर बहुत है ताकतवर उस मे अगर क्रोध बर्दाश्त करने का है अगर दम, शक्ति शाली जाएगा मर, छोटी-छोटी बातों पर क्रोध आता है अगर उसे हर वक्त। म�
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भारत का सौंदर्य-भारत मेरी जन्मभूमि हमारी कर्म भूमि जिसके कण कण में बसा है इतिहास
भारत मेरी जन्मभूमि हमारी कर्मभूमि, जिसके कण कण में बसा है इतिहास, इसका हर पल है खास। गंगा, यमुना, कृष्णा, कावेरी की धार, कश्मीर से कन्य�
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सुबह की पहली किरण को देख कर-खिड़की खोलते ही सूरज की अनगिनत किरणें समा जाता है
सुबह की पहली किरण को देख कर मैंने अपने कमरे की खिड़की खोली! खिड़की खोलते ही मेरे कमरे में समा जाता है सूरज की अनगिनत किरणें! कुछ उड़त�
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बाहर बारिश हो रही है-सड़के कितनी भीगी भीगी सी है
अरे सुनो प्रिय !बाहर बारिश हो रही है । कुछ देर बैठो तो मेरे पास! क्या ?हसीन हवा चल रही है सुनो कुछ याद आ रहा है ! कभी इस बारिश के मौसम में
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आपकी नज़रों से नज़रें मिली-डूबती मेरी नैया को किनारा मिली
आपकी नजरों से नजरें हैं मिली। प्यासी मेरी नज़र को तृप्ति है मिली।। नज़रों में नज़र आईं है मंज़िल। डूबती मेरी नैया को किनारा मिली।।
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हे जीवन गात-समय भूलने की इच्छा में किसका जीवन हो परिहास
हे जीवन गात। कहां हो प्राप्त। समय भूलने की इच्छा में किसका जीवन हो परिहास। जीवन में अभिराम कहां बस इच्छा की भेंट चढ़े हैं। किसकी ओर �
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