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बसंत ऋतु के सुनहरे दिनों में, एक गांव में अनन्या जीवन बिता रही थी। उसकी खुशहाल जिंदगी में शोभा भरी थी, और उसके आसपास खूबसूरती बिखरी हुई read more >>
(दोहा छंद) सबकुछ अच्छा आपका,कैसा यह संयोग। जीवन में यह याद रख, करिए नित उठ योग।। करिए नित उठ योग तो,बढ़े आयु तब खास। प्रभु से भी तब मिलन � read more >>
(दोहा छंद) मन में कर लें आज से,करिए नित उठ योग। मिले लाभ अति आपको, करें सतत तब भोग।। जीवन में है रोग अति, जानें यह सब लोग। नियंत्रण में तब read more >>
(दोहा छंद) आज कसम लें हम सभी, करूं नित्य ही योग। एक यही अरमान से,रहिए सभी निरोग।। जगमग जगमग देश का,सदा करे स्व शान। रहे विश्व को भान यह,ए� read more >>
(दोहा छंद) एक यही अरमान को,रखिए अपने पास। करिए भला समाज का,सुखद मिले अहसास।। एक यही अरमान से,रहिए सभी निरोग। आज कसम लें हम सभी,करूं नित� read more >>
(दोहा छंद) एक यही अरमान से, होगा जग में नाम। चलें वक्त के साथ तो, जीवन हो गुलफाम।। रहे जिन्दगी में खुशी, एक यही अरमान। चलते चलिए कर्म से,� read more >>
(दोहा छंद) रिश्तों को रखता बचा, जीवन में है हास। बड़े भाग्य की बात है, रिश्ते नाते खास।। बड़े भाग्य की बात है, सब साधन है आज। और अभी अरमा read more >>
(दोहा छंद) बड़े भाग्य की बात है,खुशियां मेरे पास। दिल में चाहत खूब है, होंगें पूरे आस।। बड़े भाग्य की बात है, रिश्ते नाते खास। रिश्तों � read more >>
(दोहा छंद) खुशियां घर में नित रहे, गौरव मय है माथ। बड़े भाग्य की बात है, मातु पिता हैं साथ।। बड़े भाग्य की बात है, मनुज वंश में जन्म। सदा read more >>
(दोहा छंद) दूर्जन से दूरी भली, लगा सके वह दाग। कर सकता बदनाम भी, नहीं जानता राग।। दूर्जन से दूरी भली, फँसा सके वह जान। उलझन देगा आप को, कर read more >>
(दोहा छंद) कर सकता बदनाम भी, नहीं जानता राग। दूर्जन से दूरी भली, लगा सके वह दाग।। दूर्जन से दूरी भली,बाधा में दे डाल। रुक जायेगा काम भी, read more >>
(दोहा छंद) घोंपे पीछे वह छुरा, उसका यह है जात। दूर्जन से दूरी भली, सदा करे आघात।। दूर्जन से दूरी भली, मन में रखता पाप। करता साथी का बुरा, read more >>
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