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(दोहा छंद) दिल में चाहत खूब है, होंगें पूरे आस। बड़े भाग्य की बात है,खुशियाँ मेरे पास।। बड़े भाग्य की बात है, रिश्ते नाते खास। रिश्तों � read more >>
सजा के मंडी - गद्दी पे बैठकर ; ढोंग रचा रहा पाखंडी , ले के सब सब से वोट - आघात किया दे के - सब को चोट ; तू भूल गया - अपना परिचय , जो भी है तू - है � read more >>
मुश्किल है कितना तुझे पाना। इस जग में खुद को तुझ से मिलाना। तु दूर नही है मुझसे बहुत जलाता है हमें यू तेरा नजरों से दूर जाना। मुश्किल read more >>
(दोहा छंद) खुशियां घर में नित रहे, गौरव मय है माथ। बड़े भाग्य की बात है, मातु पिता हैं साथ।। बड़े भाग्य की बात है, मनुज वंश में जन्म। सदा read more >>
(दोहा छंद) पर करना है कर्म भी, है यह बात अतीक। राम भरोसे चल रहा, यह तो है बहु ठीक।। राम भरोसे चल रहा, लोगों के विश्वास। धोखे वाले हर कहीं, � read more >>
(दोहा छंद) जनप्रतिनिधि सब मौज में,देखे नव तरकीब। राम भरोसे चल रहा, सेवक सभी गरीब।। राम भरोसे चल रहा, यह तो है बहु ठीक। पर करना है कर्म भ� read more >>
बेटी की जिंदगी, एक उलझन हैं, ना ससुराल हैं उसका, ना मायका, दोनों तरफ से पराई हैं, मन को मार के हैं जीती, कैसी रीत पुरानी है, समझते उसे बोझ, read more >>
(दोहा छंद) राम भरोसे चल रहा, वैसे तो सब काम। कण कण में प्रभु राम हैं, जाने सकल जहान।। राम भरोसे चल रहा,सरकारी सब काम। भ्रष्ट लोग भरमार म� read more >>
(दोहा छंद) सबको भागम भाग है, करते हैं अतिचार। कौतूहल सी जिंदगी,भीड़ भरा संसार।। कौतूहल सी जिंदगी,अस्त व्यस्त परिवार। रहते दुविधा में read more >>
(दोहा छंद) जिसमें अच्छे भी फंसे, और सहेंगे कष्ट। कौतूहल सी जिंदगी,और अधिक हैं भ्रष्ट।। कौतूहल सी जिंदगी,भीड़ भरा संसार। सबको भागम भा� read more >>
(दोहा छंद) कौतूहल सी जिंदगी,खुशी हुई है लोप। शायद उलझन वक्त का,और हुआ है कोप।। कौतूहल सी जिंदगी, घोर निराशा आज। भौतिक सुख की लालसा,समझ� read more >>
(दोहा छंद) करिए नित उठ योग तो,बढ़े आयु तब खास। प्रभु से भी तब मिलन हो,दिव्य शक्ति हो पास।। करिए नित उठ योग भी, इसमें है अति जोश। आभा मय हो read more >>
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