तुम इतना डर डर कर क्यों बोलते हो बोलने से पहले इतना क्यों सोचते हो बोलो खुलकर बोलो अपनी मन की बात खुल कर कहो जो डर डर कर जीने से सोच सोच क� read more >>
मासूम बचपन
मेरे मन में यदा - कदा यह सवाल उठता कि ,
" क्या बचपन बिल्कुल ही होशमंद नहीं होता या चालाकी की हद तक होशमंद होता है ?"
…
मैं अपने � read more >>
रोते से मुझको हंसाया जिसने ,
गलती पर सीने से लगाया जिसने ,मैं कैसे भूल सकता हूं , उस रहनुमा को ____
नेक राह पर चलना सिखाया जिसने ।
__शिव किशो read more >>
तेरा हर ग़म दूर होगा ,
तेरे चेहरे पे नूर होगा ,
कोई तो तुझे प्यार से देखेगा ___
तो कोई प्यार करने पर मजबूर होगा ।
_ शिव किशोर , शाहजहांपुर, यू read more >>